स्थानांतरण नीति के मुताबिक स्थानान्तरण न होने से आक्रोश*


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*लखनऊ।* उ0प्र0 चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ के प्रदेश महामंत्री एवं अखिल भारतीय राज्य सरकारी चतुर्थ श्रेणी महासंघ के राष्ट्रीय महासचिव सुरेश सिंह ने प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से जानकारी दी है कि प्रदेश के लगभग समस्त विभागों में विभागाध्यक्षों द्वारा सरकार द्वारा जारी स्थानान्तरण नीति का अनुपालन करते हुए स्थानान्तरण कर दिये गये हैं, राज्य कर विभाग में भी जोनल स्तर पर स्थानान्तरण नीति का लगभग अनुपालन कर लिया गया है, लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि राज्य कर विभाग में विभागाध्यक्ष एवं अपर आयुक्त (प्रशासन), राज्य कर, उ0प्र0 के स्तर पर एक भी स्थानान्तरण नहीं किये गये हैं। सुरेश सिंह द्वारा बताया गया कि लगभग 12 प्रार्थना पत्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी एवं लगभग 15-20 प्रार्थना पत्र वाहन चालक और लिपिक/आशुलिपिक के 350-375 प्रार्थना पत्र मुख्यालय स्तर पर प्राप्त हुए, लेकिन कोई भी स्थानान्तरण समय से नहीं पाये है। दुर्भाग्य की बात यह है कि यह विभाग मुख्यमंत्री के पास है, जो प्रदेश के मुखिया भी है।

विभाग के उच्चाधिकारी मुख्यमंत्री की छवि एवं विभाग की छवि धूमिल करने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं। प्रदेश महामंत्री श्री सुरेश सिंह ने बताया कि इस सम्बन्ध में पूर्व में ही प्रार्थना पत्र के माध्यम से मुख्यमंत्री को राज्य कर विभाग में अधिकारी/कर्मचारी गंभीर रूप से बीमार एवं दो वर्ष सेवानिवृत्त के प्रकरणों पर प्राप्त प्रार्थना पत्रों पर विचार करने के लिए अनुरोध किया गया था।

जिस संदर्भ में शासन द्वारा निर्देश भी विभाग को जारी किये जा चुके हैं, लेकिन उसके बावजूद भी कोई कार्यवाही नहीं हुई। जिसके कारण विभाग के कर्मचारियों/अधिकारियों में गहरा आक्रोश है जो स्वयं बयान जारी नहीं करते हैं। मा0 मुख्यमंत्री जी से संघ की अपील है कि विभागीय नियमावली एवं पारिवारिक गंभीर प्रकरणों चिकित्सा, शिक्षा इत्यादि के प्रार्थना पत्रों पर स्वयं संज्ञान लेते हुए शीघ्र स्थानान्तरण आदेश निर्गत करने के निर्देश पारित किया जाय जिससे समय से स्थानान्तरण हो जाने पर अपने बच्चों का शिक्षा सम्बन्धी प्रवेश प्रक्रिया ससमय सम्पन्न की जा सके।

महामंत्री सुरेश सिंह ने यह भी बताया कि विभागों में समयमान वेतनमान एवं ए0सी0पी0 का लाभ एवं पदोन्नति भी समय से नहीं की जा रही है, जबकि मुख्य सचिव द्वारा अनेकों बार आदेश निर्गत किये गये लेकिन विभागीय स्तर पर कोई सुनवाई नहीं हो रही है। उद्यान विभाग में लगभग 150 से अधिक दैनिक वेतनभोगी कर्मचारी हैं, जबकि शासनादेश शासन द्वारा निर्गत है, परन्तु अभी तक नियमितीकरण नहीं किया गया।

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