*दुग्धशाला विकास विभाग की योजना से वित्तीय वर्ष 2024-25 में 86 तथा 2025-26 में 28 लाभार्थियों को मिला लाभ*
*आधुनिक डेयरी इकाइयों से बढ़ा दूध उत्पादन, ग्रामीण परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत*
*पशुपालकों की आय में प्रतिवर्ष 65 से 70 हजार रुपये तक की वृद्धि* 
*अमित सिंह मोनू स्वतंत्र पत्रकार बस्ती, 21 मई।* उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कुशल मार्गदर्शन में जनपद में दुग्धशाला विकास विभाग द्वारा संचालित नंद बाबा दुग्ध मिशन ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई मजबूती देने के साथ पशुपालकों के लिए आय बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। योजना के अंतर्गत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 86 तथा वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक 28 लाभार्थियों को लाभान्वित किया गया है। योजना के माध्यम से पशुपालकों को डेयरी इकाई स्थापना, दुग्ध उत्पादन बढ़ाने तथा आधुनिक पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए सहायता उपलब्ध कराई जा रही है।
इस योजना से जुड़े पशुपालकों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार देखने को मिला है। दूध उत्पादन बढ़ने से ग्रामीण परिवारों की आय में निरंतर वृद्धि हो रही है और स्वरोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार लाभार्थियों की वार्षिक आय में औसतन 65 से 70 हजार रुपये तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
विकासखंड बनकटी के ग्राम नगरा निवासी दयानाथ शुक्ला ने वर्ष 2024-25 में डेयरी इकाई स्थापित की। वर्तमान में उनकी वार्षिक आय लगभग एक लाख रुपये तक पहुंच गई है तथा उनका औसत वार्षिक दुग्ध उत्पादन लगभग 2000 लीटर है। दयानाथ शुक्ला का कहना है कि योजना से मिली सहायता ने पशुपालन को लाभकारी व्यवसाय बनाने में बड़ी भूमिका निभाई है।
इसी प्रकार विकासखंड सदर के मरवतिया बाबू निवासी अभिलाष सिंह उर्फ अमित सिंह ने वर्ष 2025-26 में डेयरी इकाई की स्थापना की। उनकी वार्षिक आय लगभग 1.70 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है तथा औसत वार्षिक दूध उत्पादन करीब 2880 लीटर है। उन्होंने बताया कि योजना से मिली सहायता और तकनीकी मार्गदर्शन के कारण पशुपालन का कार्य पहले की अपेक्षा अधिक व्यवस्थित और लाभकारी हुआ है।
वहीं सुकरौली क्षेत्र के पिथौरा चौधरी निवासी जगदंबा सिंह वर्ष 2023-24 से डेयरी इकाई का संचालन कर रहे हैं। वर्तमान में उनकी वार्षिक आय लगभग 2.16 लाख रुपये है तथा उनका औसत वार्षिक दूध उत्पादन 5400 लीटर तक पहुंच गया है। उन्होंने बताया कि नंद बाबा दुग्ध मिशन ने ग्रामीण पशुपालकों को आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
जनपद में डेयरी विकास को बढ़ावा मिलने से दुग्ध उत्पादन में लगातार वृद्धि हो रही है। ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालन अब केवल परंपरागत कार्य न रहकर आय का मजबूत साधन बनता जा रहा है। योजना से युवाओं और छोटे किसानों का रुझान भी डेयरी व्यवसाय की ओर बढ़ा है। विभाग द्वारा पशुपालकों को प्रशिक्षण, तकनीकी सलाह तथा बेहतर नस्ल के पशुपालन के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इसी प्रकार योजनाओं का प्रभावी क्रियान्वयन जारी रहा तो आने वाले समय में बस्ती जनपद दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नई पहचान स्थापित कर सकता है। नंद बाबा दुग्ध मिशन ग्रामीण आत्मनिर्भरता और किसानों की आर्थिक समृद्धि की दिशा में एक मजबूत कदम साबित हो रहा है।
