
संतोष सिंह / गोरखपुर: उत्तर प्रदेश के गोरखपुर स्थित शहीद अशफाक उल्ला खान प्राणि उद्यान में पर्यावरण संरक्षण और शिक्षा को जोड़ने वाली एक बेहद अनूठी और अभिनव पहल की शुरुआत की गई है। यहाँ अब पौधों को सिर्फ लगाया ही नहीं जा रहा, बल्कि उन्हें एक ‘डिजिटल पहचान’ भी दी जा रही है। शहर के प्रमुख व्यापारी नेता आलोक अग्रवाल द्वारा शुरू की गई इस पहल के तहत, लगाए गए पौधों को एक विशेष आईडी कार्ड और क्यूआर (QR) कोड के साथ जोड़ा जा रहा है, जो उन्हें देश का पहला ऐसा ‘स्मार्ट’ पौधारोपण प्रोजेक्ट बनाता है।
इस कार्यक्रम के तहत, चिड़ियाघर में लगाए जा रहे हर पौधे पर एक पहचान पत्र लगाया जा रहा है। इस कार्ड में पौधे का नाम और प्रजाति (Species), वैज्ञानिक नाम (Scientific Name), क्यूआर कोड (QR Code) दर्ज होती है, जिसे स्कैन करते ही मोबाइल पर उस पौधे से जुड़ी पूरी जानकारी मिल जाती है।
इस पहल के पीछे मुख्य उद्देश्य चिड़ियाघर को केवल एक मनोरंजन स्थल तक सीमित न रखकर इसे एक ‘लर्निंग सेंटर’ के रूप में विकसित करना है। इसके प्रमुख उद्देश्य लोगों को पेड़ों और प्रकृति के प्रति संवेदनशील बनाना। स्कूल-कॉलेज के छात्रों के लिए इसे एक ‘लाइव स्टडी स्पॉट’ के रूप में तैयार करना, जिससे उन्हें बॉटनी (वनस्पति विज्ञान) को आसानी से समझने में मदद मिले। अक्सर वृक्षारोपण के बाद पौधों की सुध नहीं ली जाती, लेकिन इस ‘आई कार्ड’ प्रणाली के कारण पौधों की नियमित मॉनिटरिंग और संरक्षण सुनिश्चित हो सकेगा।
व्यापारी नेता आलोक अग्रवाल, जिन्होंने इस पहल को मूर्त रूप दिया है, का मानना है कि डिजिटल युग में पर्यावरण को तकनीक से जोड़ना समय की मांग है। उन्होंने बताया, “लोग पौधे तो लगा देते हैं, लेकिन बाद में उनका संरक्षण नहीं हो पाता। अब इन पौधों के पास अपनी डिजिटल आईडी होने से इनकी जिम्मेदारी तय होगी और यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि पौधे सुरक्षित रहें और बढ़ें।”
प्रदेश के मुख्यमंत्री के जन्मदिन के उपलक्ष्य में विशेष ‘हाइटेक ब्रीड’ के पौधों का रोपण किया गया है। चिड़ियाघर प्रशासन ने भी इस पहल को सराहा है और इसे पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा और स्मार्ट कदम बताया है।
गोरखपुर के चिड़ियाघर की यह अनूठी पहल अब देश के अन्य शहरों के लिए एक मिसाल बन सकती है, जहाँ तकनीक और प्रकृति का मिलन न केवल पौधों को जीवन दे रहा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को पर्यावरण के प्रति जागरूक भी कर रहा है।
