1957 में आजाद भारत के पहले सांसद बने फतेहपुर के प्रतिनिधि।
17 आम चुनाव और एक उपचुनाव में 13 अलग-अलग चेहरे संसद पहुंचे।
कांग्रेस से शुरू हुआ सफर भाजपा, बसपा, सपा और जनता दल तक पहुंचा।
2024 में नरेश उत्तम पटेल ने भाजपा से सीट छीनकर सपा के खाते में दर्ज कराई जीत।
फतेहपुर की जनता का भरोसा, हर चुनाव में बदला चेहरा
पंकज कुमार अग्रहरी
सैटरडे वार्ता, फतेहपुर
गंगा-जमुनी तहजीब, किसान राजनीति और बदलते सियासी समीकरणों के लिए पहचान रखने वाले फतेहपुर की लोकसभा राजनीति का इतिहास काफी दिलचस्प रहा है।
मौजूदा फतेहपुर लोकसभा सीट का संसदीय सफर वर्ष 1957 में अंतर हुसैनी के साथ शुरू हुआ। इसके बाद 67 साल के सफर में यहां 17 आम चुनाव और एक उपचुनाव हुए, जिसमें 13 अलग-अलग चेहरों ने जनता का प्रतिनिधित्व किया।
तब से लेकर 2024 तक फतेहपुर की जनता ने लगातार अपने नेताओं को चुनकर लोकतंत्र की मजबूती का परिचय दिया है।
1957 के पहले चुनाव से लेकर 2024 तक हर दौर में जनता ने अपनी पसंद के प्रतिनिधि को संसद भेजा और विकास, समृद्धि व क्षेत्रीय मुद्दों को प्राथमिकता दी।
2024 के चुनाव में नरेश चंद्र उत्तम पटेल ने भाजपा से सीट छीनकर सपा के खाते में विजय दर्ज कराई। यह फतेहपुर के सियासी इतिहास में एक अहम मोड़ माना जा रहा है।
फतेहपुर के अब तक के सभी सांसद — एक नजर में
1957 — अंतर हुसैनी — कांग्रेस — पहली बार
1962 — गिरी शंकर उर्फ गिरी बाबू — निर्दलीय — पहली बार
1967 — संत बलराम सिंह — कांग्रेस — पहली बार
1971 — संत बलराम सिंह — कांग्रेस — दोबारा
1977 — बशीर अहमद — भारतीय लोकदल — पहली बार
1978 — सैयद लियाकत हुसैन — जनता पार्टी — उपचुनाव
1980 — हरी कृष्ण शास्त्री — कांग्रेस (आई) — पहली बार
1984 — हरी कृष्ण शास्त्री — कांग्रेस — दोबारा
1989 — विश्वनाथ प्रसाद सिंह — जनता दल — पहली बार
1991 — विश्वनाथ प्रसाद सिंह — जनता दल — दोबारा
1996 — विश्वेश्वर प्रसाद निषाद — बसपा — पहली बार
1998 — अरविंद कुमार पटेल — भाजपा — पहली बार
1999 — अरविंद पटेल — भाजपा — दोबारा
2004 — महेंद्र प्रसाद निषाद — बसपा — पहली बार
2009 — राकेश सचान — सपा — पहली बार
2014 — दिनेश प्रताप सिंह — भाजपा — पहली बार
2019 — दिनेश प्रताप सिंह — भाजपा — दोबारा
2024 — नरेश चंद्र उत्तम पटेल —
सपा — पहली बार
फतेहपुर का संसदीय सफर : 1957 से 2024
1957
अंतर हुसैनी ने पहली बार फतेहपुर से लोकसभा सांसद बनकर क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया।
1962
कांग्रेस के गिरी शंकर उर्फ गिरी बाबू ने जिले की जनता का भरोसा जीता।
1967
संत बलराम सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर पहली बार जीत दर्ज की।
1971
संत बलराम सिंह दूसरी बार फिर कांग्रेस से सांसद बने।
1977
बशीर अहमद ने भारतीय लोकदल के टिकट पर फतेहपुर से जीत हासिल की।
1978
सैयद लियाकत हुसैन ने उपचुनाव में जनता पार्टी से सांसद बनकर क्षेत्र में नई उम्मीद जगाई।
1980
हरी कृष्ण शास्त्री कांग्रेस (आई) के टिकट पर पहली बार सांसद चुने गए।
1984
हरी कृष्ण शास्त्री ने कांग्रेस से दूसरी बार जीत दर्ज की।
1989
विश्वनाथ प्रसाद सिंह जनता दल के टिकट पर फतेहपुर से सांसद बने।
1991
विश्वनाथ प्रसाद सिंह ने जनता दल से दूसरी बार जीत हासिल की।
1996
विश्वेश्वर प्रसाद निषाद बसपा के टिकट पर पहली बार फतेहपुर से सांसद बने और क्षेत्र में नई राजनीतिक शुरुआत हुई।
1998
अरविंद कुमार पटेल ने भाजपा के टिकट पर पहली बार फतेहपुर की जनता का प्रतिनिधित्व किया।
1999
अरविंद पटेल ने भाजपा से दूसरी बार चुनाव जीतकर अपना प्रभाव कायम रखा।
2004
महेंद्र प्रसाद निषाद ने बसपा के टिकट पर जीत हासिल की।
2009
राकेश सचान ने सपा के टिकट पर फतेहपुर से पहली बार सांसद बनने का गौरव हासिल किया।
2014
दिनेश प्रताप सिंह ने भाजपा से पहली बार जीत दर्ज की।
2019
दिनेश प्रताप सिंह ने भाजपा से दूसरी बार सांसद बनकर जीत दोहराई।
2024
नरेश चंद्र उत्तम पटेल ने भाजपा को हराकर सपा के टिकट पर फतेहपुर से विजय हासिल की।
कांग्रेस से शुरू हुआ सफर, भाजपा-सपा तक पहुंचा
फतेहपुर के संसदीय इतिहास को देखें तो शुरुआत कांग्रेस से हुई, लेकिन समय के साथ यहां भारतीय लोकदल, जनता पार्टी, जनता दल, बसपा, भाजपा और सपा जैसे विभिन्न राजनीतिक दलों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
लगातार बदलते राजनीतिक समीकरणों के बीच फतेहपुर की जनता ने अलग-अलग समय पर अलग-अलग दलों और प्रत्याशियों पर भरोसा जताया।
1990 के दशक में बसपा और भाजपा का प्रभाव बढ़ा, जबकि 2009 में सपा ने यहां अपनी जगह बनाई। 2014 और 2019 में भाजपा ने लगातार दो चुनावों में जीत दर्ज की।
2024 में सपा ने भाजपा को हराकर एक बार फिर फतेहपुर की राजनीति में अपनी मजबूत वापसी दर्ज की।
फतेहपुर के सांसदों की बदलती राजनीतिक तस्वीर
कभी कांग्रेस का दबदबा रहा तो कभी जनता दल, बसपा और भाजपा ने यहां अपनी पकड़ मजबूत की। पिछले कुछ दशकों में सपा ने भी फतेहपुर की राजनीति में अपनी जगह बनाई।
1990 के दशक में बसपा का प्रभाव बढ़ा। इसके बाद 2014 और 2019 में भाजपा ने लगातार जीत दर्ज की।
2024 में सपा की वापसी ने फतेहपुर की राजनीति को नया संकेत दिया है।
सबसे महत्वपूर्ण तथ्य
फतेहपुर की लोकसभा सीट से 1957 से 2024 तक कुल 17 आम चुनाव हुए। 1978 के उपचुनाव को जोड़ने पर कुल 18 बार सांसद चुना गया।
इन चुनावों में कुल 13 अलग-अलग व्यक्तियों ने फतेहपुर का प्रतिनिधित्व किया।
वर्ष 2024 में नरेश चंद्र उत्तम पटेल ने सपा के टिकट पर जीत दर्ज की।
फतेहपुर की राजनीति में बदलते समीकरण
फतेहपुर के संसदीय इतिहास में जनता ने समय-समय पर अलग-अलग राजनीतिक दलों को मौका दिया। कांग्रेस से शुरू हुआ सफर जनता दल, बसपा, भाजपा और सपा तक पहुंचा।
हर चुनाव में स्थानीय मुद्दों, राजनीतिक परिस्थितियों और प्रत्याशियों की लोकप्रियता ने परिणामों को प्रभावित किया।
2024 का चुनाव भी इसी बदलते राजनीतिक समीकरण का उदाहरण रहा, जब सपा ने भाजपा से यह सीट वापस हासिल की।
