भागीरथी संस्था ने साहित्यकार बृजभूषण राय ‘बृज’को किया सम्मानित

 

बड़हलगंज: भारतीय हिन्दी साहित्य और समाज के बीच गहरे संबंधों को रेखांकित करने वाले वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि बृजभूषण राय ‘ब्रिज’ भागीरथी संस्था की ओर से सम्मानित किया गया। इस अवसर पर उनके साहित्यिक योगदान, सामाजिक चेतना और लेखन के माध्यम से समाज को दिशा देने के प्रयासों की सराहना की गई। ___बड़हलगंज विकास खण्ड की ग्राम पंचायत तीहा मुहम्मद पुर निवासी सेवा निवृत्त शिक्षक बृजभूषण राय ‘बृज’ ने साहित्य के वर्तमान स्वरूप पर अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि साहित्य केवल शब्दों का संयोजन नहीं, बल्कि समाज को दिशा देने और लोगों के भीतर चेतना जगाने का सशक्त माध्यम है। साहित्य की सार्थकता तभी है, जब उसका जुड़ाव समाज, संस्कृति और आम जनजीवन से बना रहे। उन्होंने कहा कि आधुनिक साहित्य में अपनी जगह बनाने की होड़ के बीच कहीं न कहीं जमीनी जुड़ाव, पारंपरिक मूल्यों, सामाजिकता और लोक रंग की उपस्थिति कम होती दिखाई दे रही है। साहित्य में आम जनजीवन की पीड़ा, संघर्ष और संवेदनाओं को पर्याप्त स्थान मिलना चाहिए। यदि साहित्य समाज के सामान्य व्यक्ति के सुख-दुख और संघर्षों से दूर हो जाता है, तो उसकी संवेदनशीलता प्रभावित होती है। कवि ने कहा कि साहित्य और लेखनी का आधार सत्य, संवेदना और समाज से जुड़ाव
होना चाहिए। लेखन में देशप्रेम, सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ आवाज और मानवीय मूल्यों की अभिव्यक्ति जरूरी है। उन्होंने नई पीढ़ी के रचनाकारों से आह्वान किया कि वे अपनी रचनाओं में सामाजिक सरोकारों, देशप्रेम और लोक संस्कृति को प्रमुखता दें। भगवान श्रीराम और श्रीरामचरितमानस के प्रति अपनी आस्था का उल्लेख करते हुए बृजभूषण राय ‘बृज’ ने कहा कि प्रभु श्रीराम के जीवन दर्शन से उन्हें सदैव प्रेरणा मिली है। उनकी पहली रचना ‘जंग-ए-आजादी’ वर्ष 2010 में प्रकाशित हुई थी। इसके बाद उनकी साहित्यिक यात्रा निरंतर आगे बढ़ती रही और अब तक उनकी 15 पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं। इनमें छह पुस्तकों का संस्कृत से हिंदी रूपांतरण भी शामिल है। आधुनिक व्यवस्था पर विचार व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि भौतिक प्रगति के साथ सामाजिक अनुशासन, शिष्टाचार और आपसी मेल-मिलाप जैसे जीवन-मूल्यों को भी महत्व दिया जाना चाहिए। नई पीढ़ी को ऐसी साहित्यिक रचनाओं की आवश्यकता है, जो समाज की वास्तविक समस्याओं को सामने लाने के साथ सकारात्मक बदलाव की प्रेरणा दें। उन्होंने विश्वास जताया कि साहित्यकार अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में जागरूकता पैदा करने और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

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