*बालिका मदद योजना बनी जरूरतमंद परिवारों का संबल*

 

*2025-26 में 1,900 लाभार्थियों को ₹8.63 करोड़ से अधिक की सहायता राशि वितरित*

*माताओं, नवजात शिशुओं एवं बालिकाओं को मिली आर्थिक सुरक्षा, सामाजिक संरक्षण और बेहतर भविष्य की नई उम्मीद*

अमित सिंह मोनू स्वतंत्र पत्रकार

*बस्ती, 2 जून।* माताओं, नवजात शिशुओं और बालिकाओं के सामाजिक एवं आर्थिक संरक्षण के उद्देश्य से संचालित मातृ, शिशु एवं बालिका मदद योजना जनपद बस्ती में जरूरतमंद परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सहारा बनकर उभरी है। योजना के माध्यम से आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को समय पर सहायता उपलब्ध कराकर उनके जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का कार्य किया जा रहा है।
जनपद में इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन का परिणाम है कि वित्तीय वर्ष 2024-25 में कुल 433 लाभार्थियों को ₹1,89,93,498 की सहायता राशि प्रदान की गई। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 1,900 हो गई और ₹8,63,28,056 की धनराशि वितरित की गई। यह वृद्धि योजना के प्रति बढ़ती जागरूकता और प्रशासन की सक्रियता को दर्शाती है।
योजना का मुख्य उद्देश्य माताओं, नवजात शिशुओं एवं बालिकाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके स्वास्थ्य, पोषण एवं समग्र विकास को सुनिश्चित करना है। आर्थिक कठिनाइयों का सामना कर रहे परिवारों को इस सहायता से राहत मिलती है और वे बच्चों की देखभाल, स्वास्थ्य सेवाओं तथा आवश्यक जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा कर पाते हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन के शुरुआती वर्षों में मिलने वाला पोषण और स्वास्थ्य संरक्षण बच्चे के भविष्य को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। ऐसे में यह योजना न केवल तत्काल आर्थिक सहायता प्रदान करती है, बल्कि बालिकाओं और शिशुओं के सुरक्षित एवं स्वस्थ भविष्य की नींव भी रखती है।
जनपद प्रशासन द्वारा योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार और पात्र लाभार्थियों तक समयबद्ध सहायता पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार पात्र परिवारों को योजना का लाभ दिलाने हेतु आवेदन प्रक्रिया को सरल बनाया गया है तथा पारदर्शी व्यवस्था के माध्यम से सहायता राशि सीधे लाभार्थियों तक पहुंचाई जा रही है।
मातृ, शिशु एवं बालिका मदद योजना ने बस्ती जनपद में हजारों परिवारों को नई उम्मीद और संबल प्रदान किया है। आर्थिक सहायता के साथ-साथ यह योजना समाज के कमजोर वर्गों को सुरक्षा और सम्मान का एहसास कराते हुए महिला एवं बाल कल्याण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हो रही है।

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