*ओवरलोड वाहनों का दबाव अधिक पड़ने से पुल की घटिया मरम्मत की खुली पोल*
*पंकज अग्रहरि।सैटरडेवार्ता,फतेहपुर।* असनी गंगा पुल प्रयागराज क्षेत्र के साथ रायबरेली, प्रतापगढ़ और राजधानी को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण पुल है। इस मार्ग से प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। भारी वाहनों की लगातार आवाजाही और ओवरलोड वाहनों के दबाव के कारण पुल की सड़क पर असर पड़ रहा है। मरम्मत पर करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क की हालत फिर बिगड़ने लगी है।
पुल की मरम्मत में करीब 15 करोड़ रुपये खर्च किए गए थे। इसके बाद उम्मीद थी कि लोगों को लंबे समय तक राहत मिलेगी, लेकिन मरम्मत के कुछ ही महीनों बाद सड़क की सतह पर खराबी दिखाई देने लगी। जुलाई में आवागमन शुरू होने के तीन माह के भीतर ही एक्सपेंशन ज्वाइंट के आसपास सड़क उखड़ने लगी है।
डामर और मिट्टी खिसकने से पुल की सतह पर लंबी नालीनुमा गड्ढे से तब्दील हो गई है। पुल से गुजरते समय वाहनों के पहियों का संतुलन बिगड़ रहा है। संतुलन बिगड़ने से किसी भी समय बड़ा हादसा हो सकता है।
पुल के ऊपर से ओवरलोड वाहनों के चलने से पुल की घटिया निर्माण की पोल खुल गई है। इससे स्थानीय लोगों में आक्रोश व्याप्त है।
असनी गंगा पुल 1.20 किलोमीटर लंबा है। इसकी चौड़ाई और एक्सपेंशन ज्वाइंट बदलने के साथ ऊपरी सतह की मरम्मत के लिए शासन से 15 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए थे। भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) रायबरेली की ओर से 11 मार्च को काम पूरा कर 20 जुलाई को आवागमन बहाल किया गया था।
मरम्मत के बाद वाहन चालकों को सुरक्षित सफर मिलने की उम्मीद थी, लेकिन सड़क की मौजूदा स्थिति ने इस उम्मीद पर सवाल खड़े कर दिए हैं। पुल से गुजरने वाले वाहनों की संख्या अधिक होने के कारण सड़क पर लगातार दबाव बना रहता है।
स्थानीय नागरिकों ने जताई चिंता
संतोष चौरसिया का कहना है कि असनी गंगा पुल कई जिलों के आवागमन का प्रमुख रास्ता है। यहां दिनभर वाहनों की आवाजाही बनी रहती है। भारी वाहनों के दबाव के कारण एक्सपेंशन ज्वाइंट जल्दी खराब हो रहे हैं। संबंधित अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण करना चाहिए।
बृजेश बाजपेई के मुताबिक, पुल की मरम्मत पूरी होने के बाद लोगों को उम्मीद थी कि सड़क कई वर्षों तक बेहतर बनी रहेगी, मगर कुछ ही महीनों में सड़क उखड़ने लगी है। इससे वाहन चालकों को सावधानी से निकलना पड़ता है। इसकी तत्काल जांच होनी चाहिए।
मणिकांत दुबे का कहना है कि इस पुल से रोजाना छोटे-बड़े वाहन गुजरते हैं। सड़क की खराब स्थिति के कारण वाहन चालकों को परेशानी होती है। अचानक ब्रेक लगाने या वाहन का संतुलन बिगड़ने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। उन्होंने सड़क की गुणवत्ता की जांच कराने की मांग की।
राकेश शर्मा के अनुसार, पुल की खराब हालत दोपहिया वाहन चालकों के लिए अधिक परेशानी पैदा कर सकती है। सड़क पर उखड़ी परत और असमतल हिस्सों से वाहन का संतुलन बिगड़ सकता है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को इस समस्या पर गंभीरता से ध्यान देना चाहिए।
ओवरलोड वाहनों से बढ़ रहा खतरा
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुल पर भारी और ओवरलोड वाहनों की आवाजाही लगातार बनी रहती है। इससे सड़क पर दबाव बढ़ता है। यदि समय रहते सड़क की मरम्मत और वाहनों के दबाव की निगरानी नहीं की गई, तो स्थिति और खराब हो सकती है।
मरम्मत की गुणवत्ता पर सवाल
करीब 15 करोड़ रुपये खर्च होने के बावजूद सड़क की सतह का जल्दी उखड़ना चिंता का विषय है। स्थानीय लोगों ने मांग की है कि एक्सपेंशन ज्वाइंट और सड़क की ऊपरी सतह की तकनीकी जांच कराई जाए। जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि सड़क खराब होने के पीछे निर्माण सामग्री, मरम्मत की गुणवत्ता या भारी वाहनों का दबाव कितना जिम्मेदार है।
उप प्रबंधक तकनीकी एनएचआई रायबरेली अर्जुन सिंह का बयान
असनी गंगा पुल के एक्सपेंशन ज्वाइंट और ऊपरी सतह की खराब स्थिति को लेकर एनएचएआई रायबरेली के उप प्रबंधक अर्जुन सिंह से बात की गई।
अर्जुन सिंह ने कहा कि एक्सपेंशन ज्वाइंट खुलने और ऊपरी सतह पर डामर व मिट्टी से संबंधित समस्या के विषय में वह कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। उन्होंने इस संबंध में प्रबंधक से बात करने की सलाह दी।
अब संबंधित प्रबंधक का पक्ष जानना भी जरूरी है, ताकि सड़क की स्थिति और मरम्मत कार्य को लेकर विभाग का आधिकारिक पक्ष सामने आ सके।
जांच और कार्रवाई की मांग
स्थानीय नागरिकों की मांग है कि पुल की सड़क और एक्सपेंशन ज्वाइंट की तकनीकी जांच कराई जाए। यदि निर्माण या मरम्मत कार्य में कोई कमी जी आवश्यक मरम्मत और जांच होने से वाहन चालकों को राहत मिल सकती है और दुर्घटनाओं की आशंका कम की जा सकती है।
