कारगिल से लेकर दाऊद-लादेन तक, यूएन में भारत ने खोली पाकिस्तान की पोल

न्यूयॉर्क। भारत ने न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद, धार्मिक स्वतंत्रता और मानवाधिकारों के मुद्दे पर पड़ोसी देश पाकिस्तान को कटघरे में खड़ा किया है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन की प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन और प्रथम सचिव रघु पुरी ने अलग-अलग चर्चाओं के दौरान तथ्यों के साथ पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को उजागर किया।
भारत के स्थायी मिशन ने एक बयान में बताया कि ‘धर्म और विश्वास की स्वतंत्रता’ पर विशेष प्रतिवेदक के साथ ‘असाधारण परिस्थितियों में अंतिम संस्कार के अधिकारों’ पर आयोजित एक संवाद में प्रथम सचिव भाविका मंगलानंदन ने हिस्सा लिया। उन्होंने पाकिस्तान पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि यह बेहद हैरान करने वाला है कि जो देश 1999 के कारगिल युद्ध में मारे गए अपने ही सैनिकों के शवों को स्वीकार करने के लिए तैयार नहीं था, वह आज आस्था, धार्मिक स्वतंत्रता और दफनाने के अधिकारों पर इतनी मुखरता से बात कर रहा है।
उन्होंने पाकिस्तानी प्रतिनिधि को याद दिलाया कि यह भारतीय सेना ही थी, जिसने पाकिस्तान द्वारा ठुकराए गए उनके सैनिकों के शवों को पूरे सैन्य सम्मान और इस्लामी रीति-रिवाजों के साथ दफनाकर मानवता का परिचय दिया था।
इससे पहले महासभा की तीसरी समिति में आतंकवाद का मुकाबला करने और मानवाधिकारों की रक्षा के विषय पर चर्चा हुई। इस दौरान प्रथम सचिव रघु पुरी ने संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में तथ्यात्मक कमियों को सुधारते हुए स्पष्ट किया अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम 1993 के मुंबई बम धमाकों के बाद से ही भारत में वांछित है। 1267 प्रतिबंध तंत्र के तहत दाऊद को सूची में शामिल करने के आधिकारिक कारणों के विवरण में यह साफ लिखा है कि वह भारत से बहुत पहले भाग गया था। वह वर्तमान में उसी देश में शरण लिए हुए है, जहां वैश्विक आतंकी ओसामा बिन लादेन छिपा हुआ मिला था और अमेरिकी कार्रवाई में मारा गया था।
भारतीय राजनयिकों के इन बयानों ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान के आतंकी गठजोड़ को बेनकाब कर दिया है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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