*कभी पांच सीटों पर रहा बसपा का दबदबा, अब पुराने जनाधार को तलाश रही पार्टी

फतेहपुर में लगातार कमजोर हुआ प्रदर्शन, आगामी चुनाव में संगठन को मजबूत करने की तैयारी*

*पंकज कुमार अग्रहरि*
फतेहपुर। जिले की राजनीति में कभी मजबूत स्थिति रखने वाली बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अब अपने पुराने राजनीतिक आधार को दोबारा मजबूत करने की कोशिश में जुटी है। एक समय जिले की छह विधानसभा सीटों में से पांच पर कब्जा करने वाली पार्टी का प्रभाव पिछले कुछ चुनावों में लगातार कम हुआ है।

वर्ष 1996 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने जिले की छह सीटों में से पांच पर जीत दर्ज की थी। इसके बाद भी कई चुनावों में पार्टी का प्रभाव दिखाई दिया, लेकिन धीरे-धीरे संगठन और चुनावी प्रदर्शन दोनों कमजोर होते चले गए।
2002 में तीन सीटों पर मिली थी जीत
वर्ष 2002 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने खागा, हसवा और फतेहपुर विधानसभा सीट पर जीत हासिल की थी। इसके बाद वर्ष 2007 में किशुनपुर, हसवा, जहानाबाद और बिंदकी सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी विजयी रहे।
वर्ष 2012 में भी बसपा ने जिले की तीन सीटों पर कब्जा जमाया। पार्टी ने उस चुनाव में हुसैनगंज, अयाहशाह और बिंदकी विधानसभा क्षेत्रों में जीत दर्ज की थी।
इसके बाद लगातार कमजोर होता गया प्रदर्शन

वर्ष 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में बसपा जिले की किसी भी सीट पर जीत हासिल नहीं कर सकी। वर्ष 2022 के चुनाव में पार्टी ने जिले की सभी छह विधानसभा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारे थे, लेकिन कोई भी प्रत्याशी जीत दर्ज नहीं कर सका।
छहों विधानसभा क्षेत्रों को मिलाकर बसपा के प्रत्याशियों को कुल 1,48,095 मत मिले। पार्टी का कुल मत प्रतिशत लगभग 13.1 प्रतिशत रहा।
जहानाबाद में मिला सबसे अधिक समर्थन

वर्ष 2022 के चुनाव परिणामों पर नजर डालें तो जहानाबाद विधानसभा सीट पर बसपा का प्रदर्शन अन्य सीटों की तुलना में बेहतर रहा। यहां पार्टी प्रत्याशी को 39,205 वोट मिले और मत प्रतिशत 20.8 प्रतिशत रहा।
बिंदकी में बसपा को 23,358 वोट, अयाहशाह में 22,045 वोट, खागा में 22,115 वोट, हुसैनगंज में 21,009 वोट और फतेहपुर विधानसभा क्षेत्र में 20,363 वोट प्राप्त हुए।
पुराने सामाजिक आधार को जोड़ना चुनौती

एक समय जिले की राजनीति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली बसपा के सामने अब अपने पुराने मतदाताओं और कार्यकर्ताओं को दोबारा सक्रिय करने की चुनौती है।

1996 में पांच सीटों पर जीत दर्ज करने वाली पार्टी का वर्ष 2022 में एक भी सीट न जीत पाना उसके बदलते राजनीतिक प्रभाव को दिखाता है। हालांकि पार्टी को छहों सीटों पर वोट मिले हैं, जिससे उसका आधार पूरी तरह खत्म नहीं माना जा सकता।
बूथ स्तर तक संगठन मजबूत करने पर जोर

आगामी विधानसभा चुनाव को ध्यान में रखते हुए पार्टी संगठन को विधानसभा से लेकर बूथ स्तर तक मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के साथ ही विभिन्न स्तरों पर सम्मेलन और संगठनात्मक कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।

पार्टी की कोशिश पुराने मतदाताओं को दोबारा अपने साथ जोड़ने के साथ-साथ नए सामाजिक समीकरण तैयार करने की भी है।

आने वाला चुनाव बताएगा कितनी मजबूत हुई वापसी की तैयारी
अब नजर इस बात पर रहेगी कि आगामी विधानसभा चुनाव में बसपा अपने पुराने जनाधार को कितना वापस हासिल कर पाती है। पार्टी के लिए संगठन को मजबूत करना और मिले हुए वोटों को जीत में बदलना सबसे बड़ी चुनौती बनी हुई है।*

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