जिला मुख्यालय पर वित्तीय फाइलें लंबित, ग्राम पंचायतों के विकास कार्यों पर ब्रेक

 

प्रांजल श्रीवास्तव

संतकबीरनगर: जिले की ग्राम पंचायतों में प्रशासकों की नियुक्ति के कई माह बाद भी विकास कार्यों से जुड़ी वित्तीय फाइलों के निस्तारण में कथित देरी को लेकर सवाल उठने लगे हैं। ग्राम पंचायतों के प्रशासकों का आरोप है कि वित्तीय स्वीकृति से संबंधित फाइलें जिला मुख्यालय और ब्लॉक स्तर पर लंबित होने के कारण गांवों में जरूरी विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। प्रशासकों ने नवागत जिलाधिकारी अनुज मलिक से मामले की समीक्षा कर लंबित फाइलों का नियमानुसार शीघ्र निस्तारण कराने की मांग की है।

प्रशासकों के मुताबिक, सदर विकासखंड खलीलाबाद, बघौली और नाथनगर सहित जिले के अन्य विकासखंडों से विकास कार्यों की वित्तीय स्वीकृति के लिए भेजी गई कई फाइलें लंबे समय से लंबित हैं। उनका कहना है कि ग्राम पंचायत स्तर से प्रस्ताव और आवश्यक अभिलेख उपलब्ध कराने के बाद भी फाइलों की प्रक्रिया आगे बढ़ने में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई दे रही है।

प्रशासकों ने कुछ मामलों में कमीशन के कथित दबाव के कारण फाइलों को आगे बढ़ाने में देरी किए जाने का आरोप भी लगाया है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। उनका कहना है कि यदि आरोपों में तथ्य हैं तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और यदि प्रक्रिया संबंधी कोई कमी है तो उसे दूर कर फाइलों का समयबद्ध निस्तारण कराया जाना चाहिए।

नाथनगर में महज 16 परियोजनाओं की स्वीकृति का दावा

नाथनगर विकासखंड के प्रशासकों के अनुसार, उनकी नियुक्ति के बाद विकास कार्यों से संबंधित कई परियोजनाओं की वित्तीय स्वीकृति के लिए फाइलें भेजी गईं, लेकिन अब तक करीब 16 परियोजनाओं की फाइलें ही स्वीकृति के बाद वापस लौट सकी हैं। प्रशासकों का दावा है कि शेष परियोजनाओं की स्थिति स्पष्ट नहीं होने से ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की गति प्रभावित हो रही है।

सदर ब्लॉक खलीलाबाद और बघौली विकासखंड से जुड़े प्रशासकों ने भी लंबित फाइलों के कारण गांवों में विकास कार्य प्रभावित होने की बात कही है। उनका कहना है कि सड़क मरम्मत, नाली निर्माण, जलनिकासी और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़े कार्यों की आवश्यकता कई गांवों में बनी हुई है, लेकिन प्रशासनिक और वित्तीय प्रक्रिया पूरी नहीं होने से कार्य शुरू नहीं हो पा रहे हैं।

ब्लॉक स्तर पर भी देरी के आरोप

प्रशासकों ने ब्लॉक मुख्यालयों पर तैनात एडीओ पंचायतों की कार्यप्रणाली को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कई फाइलों को आवश्यक प्रक्रिया पूरी करने में अनावश्यक समय लग रहा है। प्रशासकों ने मांग की है कि जिला प्रशासन ब्लॉकवार लंबित फाइलों की स्थिति की समीक्षा कर यह निर्धारित करे कि किस स्तर पर कितनी फाइलें लंबित हैं और उनके निस्तारण में देरी का कारण क्या है।

ग्राम पंचायतों में सड़कें, नालियां और जलनिकासी जैसी बुनियादी समस्याएं लंबे समय से ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। ऐसे में वित्तीय स्वीकृति और प्रशासनिक प्रक्रिया में देरी का सीधा असर विकास कार्यों पर पड़ने की बात कही जा रही है।

डीएम से जांच और समयबद्ध निस्तारण की मांग

प्रशासकों का कहना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों को राजनीतिक गतिविधियों से अलग रखते हुए नियमों के अनुसार आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने जिलाधिकारी अनुज मलिक से मांग की है कि सदर ब्लॉक खलीलाबाद, बघौली, नाथनगर सहित सभी विकासखंडों की लंबित वित्तीय फाइलों की ब्लॉकवार समीक्षा कराई जाए।

साथ ही, जिन फाइलों में अनावश्यक विलंब हुआ है, उसके कारणों की जांच कर जिम्मेदारी तय करने तथा पात्र परियोजनाओं को नियमानुसार शीघ्र वित्तीय स्वीकृति दिलाने की मांग की गई है।

प्रशासकों का कहना है कि चुनाव के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों की बुनियादी समस्याओं और विकास को लेकर तमाम वादे किए जाते हैं, लेकिन मौजूदा समय में जब गांवों को विकास कार्यों की आवश्यकता है, तब लंबित फाइलों के कारण योजनाएं जमीन पर उतरने में देरी नहीं होनी चाहिए। अब उनकी निगाहें नवागत जिलाधिकारी की ओर हैं कि वह इस पूरे मामले की समीक्षा कर लंबित फाइलों के निस्तारण के लिए क्या कदम उठाती हैं।

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