*हटाए गए कर्मचारियों को तत्काल बहाल करने की मांग*


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*लखनऊ।* उत्तर प्रदेश पावर कार्पोरेशन निविदा संविदा कर्मचारी संघ के प्रदेश महामंत्री देवेन्द्र कुमार पाण्डेय नें बताया कि लखनऊ के पदाधिकारियों द्वारा ऊर्जा मंत्री द्वारा बिना कारण संविदा कर्मियों को सेवा से न हटाए जाने संबंधी दिए गए निर्देशों का स्वागत करते हुए पावर कॉरपोरेशन प्रबंधन से मांग की है कि मैनपावर रेशनलाइजेशन के नाम पर अक्टूबर 2024 से हटाए गए लगभग 25,000 आउटसोर्स कर्मचारियों को तत्काल कार्य पर वापस लिया जाए।

उन्होंने कहा कि संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि वर्ष 2017 में जारी आदेश के अनुसार शहरी क्षेत्रों के विद्युत उपकेंद्रों पर 36 तथा ग्रामीण क्षेत्रों के विद्युत उपकेंद्रों पर 20 आउटसोर्स कर्मचारियों को तैनात करने की व्यवस्था निर्धारित की गई थी। इसी मानक के आधार पर प्रदेश की विद्युत व्यवस्था वर्षों तक सुचारु रूप से संचालित होती रही।

संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि समय के साथ साथउपभोक्ताओं, 11 के वी आउटगोइंग पोषकों, ट्रांसफार्मरों आदि की संख्या में वृद्धि होने के कारण अब कर्मचारियों कि कमी महसूस हो रही थी इसके बावजूद भी पावर कॉरपोरेशन प्रबन्धन द्वारा नियम विरुद्ध छटनी की गई।

उन्होंने कहा कि संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों संख्या कम होने से कर्मचारियों पर कार्य का अधिक भार पड़ने एवं आउटसोर्स कर्मचारियों से नियम विरुद्ध कार्य कराने के कारण बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों कि दुर्घटनाओं में बड़े पैमाने पर मृत्यु हो रही है।

संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि आउटसोर्स कर्मचारियों कि दुर्घटनाओं में बड़े पैमाने पर हो रही दुर्घटनाओं में मृत्यु को ध्यान में रखकर, पावर कार्पोरेशन का ध्यान कर्मचारियों कि दुर्घटनाओं के तरफ आकृष्ट करने के लिए संगठन द्वारा श्रद्धांजलि सभा का आयोजन किया गया।

उन्होंने कहा कि संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि श्रद्धांजलि सभा करने के बावजूद भी पावर कॉरपोरेशन प्रबन्धन द्वारा दुर्घटनाओं का संज्ञान न लेने के कारण आउटसोर्स कर्मचारियों का नियमित रुप से दुर्घटनाओं में मृत्यु हो रही है।

संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि नए टेंडरों में निर्धारित मानकों को दरकिनार करते हुए शहरी क्षेत्रों में 36 आउटसोर्स कर्मचारियों के स्थान पर मात्र 18.5 तथा ग्रामीण क्षेत्रों में 20 कर्मियों के स्थान पर केवल 12.5 कर्मियों को तैनात करने कि व्यवस्था का प्रावधान किया जा रहा है तथा राजधानी लखनऊ सहित जिन स्थानों पर वर्टिकल रिस्ट्रक्चरिंग किया गया है उन स्थानों पर 7.5 कर्मचारियों को तैनात किया जा रहा है।

संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि 55 वर्ष का हवाला देकर अनुभवी बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों को कार्य से हटाने का निर्णय पूरी तरह अन्यायपूर्ण एवं अमानवीय है। अनेक ऐसे संविदा कर्मी, जिन्होंने बिजली व्यवस्था को बनाए रखने के दौरान दुर्घटनाओं में अपने हाथ-पैर तक गंवा दिए, उन्हें भी सेवा से बाहर कर दिया गया।

संगठन पदाधिकारियों ने सवाल उठाया कि जब निगमों के शीर्ष अधिकारियों और प्रबंध निदेशकों की सेवानिवृत्ति आयु 62 वर्ष है, तब बिजली आउटसोर्स कर्मचारियों को 55 वर्ष की आयु में हटाने का क्या औचित्य है-?

संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि भीषण गर्मी के दौरान विद्युत आपूर्ति में आ रही बाधाओं और फॉल्ट की घटनाओं में कोई असामान्य वृद्धि नहीं हुई है, बल्कि समस्या यह है कि फॉल्टों को तत्काल ठीक करने वाले अनुभवी आउटसोर्स कर्मचारियों की संख्या लगातार घटाई जा रही है।

परिणामस्वरूप उपभोक्ताओं को लंबे समय तक बिजली बाधित रहने की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और विद्युत कर्मचारियों पर भी कार्यभार असहनीय रूप से बढ़ गया है। ऐसे में माननीय ऊर्जा मंत्री जी के निर्देश को ध्यान में रखकर हटाए गए सभी आउटसोर्स कर्मचारियों को तत्काल सेवा में बहाल किया जाना चाहिए।

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