बस्ती मे मनरेगा बनी ग्रामीण विकास और रोजगार का मजबूत आधार

 

*मनरेगा के तहत वित्तीय वर्ष 2024-25 में 1.31 करोड़ से अधिक मानव दिवस का सृजन*

*2.12 लाख परिवारों को मिला रोजगार; महिलाओं की 52 प्रतिशत सहभागिता और 26,802 परिवारों को 100 दिन का मिला रोजगार*

अमित सिंह मोनू स्वतंत्र पत्रकार                                   *बस्ती, 26 मई।* महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) जनपद बस्ती में ग्रामीण परिवारों के लिए रोजगार और आजीविका का बड़ा सहारा बनकर उभरी है। जनपद में यह योजना 15 मई 2007 से संचालित है और वर्तमान में जिले के सभी 14 विकास खंडों की 1185 ग्राम पंचायतों में प्रभावी रूप से क्रियान्वित की जा रही है।
मनरेगा के अंतर्गत जनपद में कुल 3,81,927 ग्रामीण परिवार जॉब कार्ड के रूप में पंजीकृत हैं, जिनमें 2,73,097 सक्रिय जॉब कार्ड शामिल हैं। योजना से जुड़े कुल श्रमिकों की संख्या 2,87,338 है। यह योजना ग्रामीण श्रमिकों को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराने के साथ ही गांवों में विकास कार्यों को गति देने का कार्य कर रही है।        
वित्तीय वर्ष 2024-25 में मनरेगा के तहत जनपद को 81,19,742 मानव दिवस सृजन का लक्ष्य प्राप्त हुआ था, जिसके सापेक्ष 1,31,09,721 मानव दिवस का सृजन किया गया। यह निर्धारित लक्ष्य का 161 प्रतिशत है, जो जिले की उल्लेखनीय उपलब्धि मानी जा रही है।
वित्तीय प्रबंधन के क्षेत्र में भी जनपद ने उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। वर्ष 2024-25 में 31,125.678 लाख रुपये के लक्ष्य के सापेक्ष 31,412.87 लाख रुपये की धनराशि का उपयोग किया गया, जो वार्षिक लक्ष्य का 100.72 प्रतिशत है।
योजना के माध्यम से वर्ष भर में 2,12,640 परिवारों को रोजगार उपलब्ध कराया गया। इसमें अनुसूचित जाति वर्ग की सहभागिता 33 प्रतिशत रही, जबकि महिलाओं की भागीदारी 52 प्रतिशत दर्ज की गई, जो महिला सशक्तिकरण की दिशा में महत्वपूर्ण संकेत है।
इसके अलावा प्रति परिवार औसतन 62 दिन का रोजगार उपलब्ध कराया गया तथा जिले के 26,802 परिवारों को 100 दिन का पूर्ण रोजगार देकर आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाया गया। मनरेगा अब केवल रोजगार योजना नहीं, बल्कि ग्रामीण विकास और सामाजिक सशक्तिकरण का प्रभावी माध्यम बन चुकी है।

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