भारत ने यूएन में समुद्री सुरक्षा, अफगानिस्तान पर रखा देश का मजबूत पक्ष

 

न्यूयॉर्क। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पी. हरीश ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की दो महत्वपूर्ण बैठकों में भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए वैश्विक शांति, समुद्री सुरक्षा और क्षेत्रीय विकास पर देश की मजबूत प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। भारत ने एक ओर अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों के पालन पर जोर दिया, तो दूसरी ओर संकटग्रस्त अफगानिस्तान के पुनर्गठन में अपने अटूट सहयोग को दोहराया।
राजदूत हरीश ने “सुरक्षित समुद्र, साझा सुरक्षा: बदलते सुरक्षा माहौल में नेविगेशन की आज़ादी की रक्षा” विषय पर आयोजित यूएनएससी की अरिया-फ़ॉर्मूला बैठक में भारत का पक्ष रखा। बैठक के दौरान भारत ने स्पष्ट और कड़े शब्दों में कहा कि वह एक ऐसे समुद्री क्षेत्र का पुरजोर समर्थन करता है जो स्वतंत्र, खुला, सुरक्षित और पूरी तरह से नियमों पर आधारित हो।
न्यूयॉर्क स्थित यूएन में भारत के स्थायी मिशन ने एक बयान में बताया कि वैश्विक व्यापार और सुरक्षा के बदलते माहौल को देखते हुए, भारत ने अंतरराष्ट्रीय कानूनों, विशेष रूप से ‘समुद्र के कानून पर संयुक्त राष्ट्र कन्वेंशन’ (अनक्लॉस) के तहत नेविगेशन की स्वतंत्रता और बेरोकटोक वाणिज्यिक गतिविधियों की रक्षा करने की आवश्यकता पर बल दिया। भारत का यह रुख हिंद-प्रशांत सहित वैश्विक समुद्री मार्गों में स्थिरता बनाए रखने के लिए बेहद अहम माना जा रहा है।
मिशन के अनुसार, भारत राजनयिक ने कहा हाल के अनुभवों से यह भी पता चलता है कि समुद्री असुरक्षा के परिणाम तत्काल खतरे से कहीं अधिक होते हैं। किसी एक अहम समुद्री रास्ते पर रुकावट से वैकल्पिक रास्तों पर दबाव बढ़ सकता है, माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ सकती है, ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति बाधित हो सकती है और विकासशील देशों पर बुरा असर पड़ सकता है। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय समुदाय को केवल अलग-अलग घटनाओं पर प्रतिक्रिया देने से आगे बढ़कर संकट के समय ज़रूरी कमर्शियल और मानवीय आपूर्ति की निरंतर आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए व्यावहारिक व्यवस्थाएं बनानी चाहिए।
इससे पहले भारतीय राजदूत ने यूएनएएमए ब्रीफ़िंग के तहत ‘अफगानिस्तान की स्थिति’ पर आयोजित यूएनएससी की बैठक में कहा कि भारत वहां एक उत्तरदायी और समावेशी व्यवस्था की उम्मीद करता है। भारत ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर साझा किया कि वह अफगानिस्तान के सभी 34 प्रांतों में 500 से अधिक जन-केंद्रित विकास साझेदारी परियोजनाओं के माध्यम से वहां के आर्थिक और सामाजिक विकास में निरंतर योगदान दे रहा है।
भारत ने स्पष्ट किया कि ये परियोजनाएं शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे और क्षमता निर्माण से जुड़ी हैं, जो सीधे तौर पर अफगान नागरिकों के जीवन को बेहतर बना रही हैं। यूएन की इन दोनों बैठकों में भारत के बयानों ने यह साफ कर दिया कि भारत वैश्विक मंचों पर न केवल एक जिम्मेदार सुरक्षा भागीदार है, बल्कि विकासशील देशों के कल्याण के लिए एक विश्वसनीय साथी भी है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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