*बस्ती में मिलेट्स की खेती को मिला बढ़ावा, 4,863 किसानों को निशुल्क बीज*

 

*दो वर्षों में किसानों को वितरित किए गए मिनी किट, मोटे अनाज की खेती के प्रति बढ़ी रुचि*

*रुद्र प्रताप, हनुमान और सत्यदेव तिवारी समेत कई किसान बने लाभार्थी*

*अमित सिंह मोनू

बस्ती, 22 अगस्त।* जिले में मोटे अनाज यानी मिलेट्स की खेती को बढ़ावा देने के लिए संचालित उत्तर प्रदेश मिलेट्स पुनरुद्धार कार्यक्रम किसानों के लिए मददगार साबित हो रहा है। योजना के तहत बीते दो वित्तीय वर्षों में बस्ती जिले के 4,863 किसानों को निशुल्क मिलेट्स मिनी किट बीज उपलब्ध कराया गया। बीज मिलने से किसानों को मिलेट्स की खेती शुरू करने में सहारा मिला है और ग्रामीण क्षेत्रों में मोटे अनाज की खेती के प्रति रुचि भी बढ़ी है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में जिले के 2,477 किसानों को निशुल्क मिलेट्स मिनी किट बीज वितरित किए गए। वहीं वित्तीय वर्ष 2025-26 में 2,386 किसानों को इसका लाभ मिला। इस तरह दो वर्षों में कुल 4,863 किसान योजना से लाभान्वित हुए हैं। किसानों को उपलब्ध कराए गए बीज से उन्हें कम लागत में मोटे अनाज की खेती करने का अवसर मिला है।
मिलेट्स में ज्वार, बाजरा, रागी, कोदो, सांवा और अन्य मोटे अनाज शामिल हैं। कम पानी में भी इन फसलों की खेती संभव होने के कारण किसानों के लिए यह उपयोगी विकल्प मानी जाती है। इसके साथ ही मिलेट्स को पोषण की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है। यही वजह है कि सरकार की ओर से किसानों को मिलेट्स की खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
योजना के प्रमुख लाभार्थियों में गौर विकासखंड के हरदी खास गांव निवासी रुद्र प्रताप, हनुमान और सत्यदेव तिवारी समेत कई किसान शामिल हैं। किसानों को निशुल्क बीज मिनी किट मिलने से खेती की लागत कम करने में मदद मिली है। इससे किसानों में पारंपरिक फसलों के साथ मोटे अनाज को भी फसल चक्र में शामिल करने की संभावना बढ़ी है।
कृषि विभाग की ओर से किसानों को मिलेट्स की खेती की तकनीक, बेहतर उत्पादन और फसल प्रबंधन के संबंध में भी जागरूक किया जा रहा है। विभाग का प्रयास है कि अधिक से अधिक किसान मिलेट्स की खेती अपनाएं और इसके माध्यम से कम लागत में बेहतर उत्पादन प्राप्त कर अपनी आय बढ़ा सकें।
मिलेट्स को बढ़ावा देने की यह पहल बस्ती में खेती के विविधीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। आने वाले समय में किसानों की भागीदारी बढ़ने से जिले में मोटे अनाज का रकबा और उत्पादन दोनों बढ़ने की उम्मीद है।

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