पड़ोसी प्रथमः डॉ. जयशंकर ने भूटान में कई विकास परियोजनाओं की दी सौगात

थिम्पू। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर भूटान की आधिकारिक यात्रा पर हैं। इस दौरान उन्होंने अपने भूटानी समकक्ष ल्योंपो डी. एन. धुंग्येल से मुलाकात की, जिसमें दोनों पक्षों ने भारत और भूटान के बीच जारी व्यापक द्विपक्षीय सहयोग की समीक्षा की। यह यात्रा न केवल दोनों देशों के बीच सदियों पुराने रणनीतिक संबंधों को दर्शाती है, बल्कि जमीनी स्तर पर भूटानी नागरिकों के जीवन को बेहतर बनाने की भारत की प्रतिबद्धता को भी रेखांकित करती है।
विदेश मंत्री के इस दौरे से भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति को और मजबूती मिली है, क्योंकि इस दौरान डॉ. जयशंकर ने विभिन्न क्षेत्रों में भारत की आर्थिक सहायता से निर्मित एवं शुरू हो रहे प्रोजेक्ट्स का उद्घाटन एवं आधारशिला रखी। उन्होंने ‘एक्स’ पर लिखा उत्तरी भूटान के गासा में 500 केडब्ल्यू के लुनाना हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की आधारशिला रखी। यह हमारे लंबे समय से चले आ रहे ऊर्जा सहयोग में एक गर्व का पल है – जो 1967 में थिम्पू में भूटान के पहले हाइड्रोइलेक्ट्रिक प्लांट ‘जुंगशिना’ से शुरू हुआ था और अब भूटान की उन आखिरी बस्तियों तक पहुंच रहा है जहां बिजली नहीं पहुंची थी।
डॉ. जयशंकर ने आगे लिखा मोंगगर में 65 बिस्तरों वाले ग्यालत्सुएन जेटसुन पेमा मदर एंड चाइल्ड हॉस्पिटल का उद्घाटन किया। यह आधुनिक सुविधा पूर्वी भूटान में मां और बच्चे की अच्छी और खास देखभाल तक पहुंच को बेहतर बनाएगी। इसके अलावा समद्रुप जोंगखर में 80 मीटर लंबे जगनाथन ब्रिज का उद्घाटन भी किया। प्रोजेक्ट दंतक द्वारा बनाया गया यह भूटान-भारत दोस्ती प्रोजेक्ट पूर्वी भूटान में त्राशीगांग और समद्रुप जोंगखर के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर बनाएगा।
इससे पहले विदेश मंत्री धुंग्येल से मुलाकात के बाद जयशंकर ने एक्स पर लिखा हमारे व्यापक सहयोग की संयुक्त रूप से समीक्षा करके खुशी हुई। बुमथांग के आध्यात्मिक और ऐतिहासिक केंद्र में मेरी मेजबानी करने के लिए उनका धन्यवाद। हमारी बातचीत विकास साझेदारी, ऊर्जा, व्यापार, कनेक्टिविटी, संस्कृति और लोगों के बीच संबंधों में हमारे बहुआयामी जुड़ाव को आगे बढ़ाने पर केंद्रित थी। आज की चर्चाओं में हमारे संबंधों का भरोसा, सद्भावना और अपनापन झलका।
डॉ. जयशंकर ने बुमथांग में राष्ट्रीय पशु प्रजनन केंद्र का दौरा भी किया और भूटान में डेयरी पशु प्रजनन कार्यक्रम को गति देने और स्थानीय किसानों की आय व दूध उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से भारत की ओर से 43 शुद्ध नस्ल की जर्सी गायें भूटानी प्रशासन को सौंपीं। उन्होंने भूटान के वित्त मंत्री ल्योनपो लेके दोरजी से भी मुलाकात की। विदेश मंत्री अपनी यात्रा के अंतिम चरण में भूटान के राजा जिग्मे खेसर नामग्येल वांगचुक से भी शाही मुलाकात करेंगे।
डॉ. जयशंकर की यह यात्रा स्पष्ट करती है कि भारत की ‘पड़ोसी प्रथम’ नीति केवल कागजी समझौतों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह भूटान के सतत विकास और आपसी विश्वास की मजबूत नींव पर टिकी हुई है।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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