‘एक्ट ईस्ट’ को मिलेगी नई गति, भारत-वियतनाम के बीच बढ़ेगा सहयोग

 

नई दिल्ली। विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने यहां वियतनाम के अपने समकक्ष ले होआई ट्रुंग के साथ व्यापार, आर्थिक, वैज्ञानिक और तकनीकी सहयोग पर 19वीं भारत-वियतनाम संयुक्त आयोग बैठक (जेसीएम) की सह-अध्यक्षता की। इस उच्च स्तरीय बैठक के दौरान दोनों मंत्रियों ने द्विपक्षीय संबंधों के सम्पूर्ण आयामों की समीक्षा की।
दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि वियतनाम की कम्युनिस्ट पार्टी के महासचिव और राष्ट्रपति टो लाम तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच हुई महत्वपूर्ण वार्ताओं (विशेषकर मई 2026 में हुई राजकीय यात्रा) ने भारत-वियतनाम ‘एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रेटेजिक पार्टनरशिप’ (संवर्धित व्यापक रणनीतिक साझेदारी) को एक नई और मजबूत गति प्रदान की है।
विदेश मंत्रालय ने एक बयान में कहा बैठक में भारत की एक्ट ईस्ट नीति और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र के तहत रक्षा, सुरक्षा, व्यापार और ऊर्जा सहयोग को और अधिक गहरा करने पर सहमति बनी। दोनों पक्षों ने ‘मेड-इन-इंडिया’ रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन और आपूर्ति को बढ़ाने के साथ-साथ कृषि, समुद्री उत्पादों और फार्मास्यूटिकल्स के लिए बाजार पहुंच का विस्तार करने पर भी विचार-विमर्श किया।
इसके अलावा दोनों देशों ने आपसी कूटनीतिक संबंधों के 55 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में वर्ष 2027 को ‘भारत-वियतनाम मित्रता वर्ष’ के रूप में मनाने का ऐतिहासिक निर्णय लिया है। इस संवाद से क्षेत्रीय स्थिरता, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और ग्लोबल साउथ के मुद्दों पर दोनों देशों की प्रतिबद्धता और अधिक मजबूत हुई है।
डॉ. जयशंकर ने बैठक के दौरान अपने प्रारंभिक वक्तव्य में कहा भारत की ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’, हमारे ‘विज़न महासागर’ और इंडो-पैसिफिक के प्रति हमारे दृष्टिकोण में वियतनाम हमारे लिए एक प्रमुख भागीदार है। आसियान के साथ हमारी ‘व्यापक रणनीतिक साझेदारी’ के ढांचे में भी वियतनाम उतना ही महत्वपूर्ण भागीदार है। हम हाल ही में एक भागीदार देश के रूप में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री की सार्थक भागीदारी के लिए धन्यवाद देते हैं।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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