कबाड़ से कमाल: प्लास्टिक की बोरियों से बनाए आकर्षक गमले

स्वच्छता ही सेवा अभियान में राजकीय हाईस्कूल नारखी की अभिनव पहल, ‘वेस्ट टू वेल्थ’ और ‘वेस्ट टू आर्ट’ से दिया पर्यावरण संरक्षण का संदेश

वैभव जैन

फिरोजाबाद। स्वच्छता को केवल सफाई तक सीमित न रखते हुए उसे रचनात्मकता, पर्यावरण संरक्षण और जनभागीदारी से जोड़ने की दिशा में राजकीय हाईस्कूल नारखी, फिरोजाबाद के विद्यार्थियों ने अभिनव पहल की है। स्वच्छता ही सेवा अभियान-2026 के अंतर्गत विद्यालय में स्वच्छता से समृद्धि’, ‘कबाड़ से जुगाड़’, ‘वेस्ट टू वेल्थ’ तथा ‘कबाड़ से कला’ (वेस्ट टू आर्ट) जैसी गतिविधियों के माध्यम से अनुपयोगी वस्तुओं के पुनः उपयोग को प्रोत्साहित किया जा रहा है।इसी क्रम में विद्यालय के विद्यार्थियों धीरेन्द्र पाल सिंह, शिवम कुमार, मनीष कुमार एवं दयाशंकर आदि ने अनुपयोगी प्लास्टिक की बोरियों का रचनात्मक उपयोग करते हुए उनसे आकर्षक गमलों का निर्माण किया। विद्यार्थियों ने अपनी कल्पनाशीलता और श्रम के माध्यम से यह संदेश दिया कि जिसे हम कचरा समझकर फेंक देते हैं, उसका रचनात्मक उपयोग कर उपयोगी एवं आकर्षक वस्तुएं तैयार की जा सकती हैं।विद्यालय के प्रधानाचार्य योगेन्द्र सिंह के मार्गदर्शन में संचालित इस नवाचार का उद्देश्य विद्यार्थियों में कचरा कम करने, पुनः उपयोग करने और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है। विद्यार्थियों द्वारा तैयार किए गए गमले विद्यालय परिसर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाने के साथ-साथ कचरा नहीं, संसाधन है’ की सोच को भी बढ़ावा दे रहे हैं।
विद्यालय के शिक्षक राजेश कुमार ने विद्यार्थियों के प्रयास की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार की गतिविधियों से बच्चों में रचनात्मकता, टीम भावना और पर्यावरण के प्रति संवेदनशीलता विकसित होती है। वहीं प्रधानाचार्य योगेन्द्र सिंह ने कहा कि विद्यालय में कबाड़ के पुनः उपयोग से संबंधित गतिविधियां लगातार संचालित की जा रही हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को केवल पुस्तकीय ज्ञान देने के बजाय उन्हें स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास का व्यावहारिक पाठ पढ़ाना है।उन्होंने कहा कि विद्यालय में स्वच्छता को जनभागीदारी से जोड़ते हुए समय-समय पर स्वच्छता से जनभागीदारी’ तथा ‘सफाई मित्र सुरक्षा एवं सम्मान’ जैसी गतिविधियों का भी आयोजन किया जाता है। साथ ही राष्ट्रव्यापी स्वच्छता श्रमदान—एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ की भावना को विद्यार्थियों और विद्यालय समुदाय के माध्यम से आगे बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं।प्रधानाचार्य ने कहा कि कबाड़ से जुगाड़’ केवल एक गतिविधि नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में समस्या समाधान, नवाचार और पर्यावरणीय जिम्मेदारी विकसित करने का माध्यम है। यदि घर और विद्यालय में अनुपयोगी वस्तुओं को फेंकने के बजाय उनका पुनः उपयोग किया जाए तो कचरे की मात्रा को कम करने के साथ-साथ स्वच्छ और सुंदर वातावरण का निर्माण किया जा सकता है।इस अवसर पर पीयूष यादव, यदुवीर सिंह सहित विद्यालय के शिक्षक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे। विद्यालय की इस पहल ने विद्यार्थियों को यह संदेश दिया कि स्वच्छता केवल झाड़ू लगाने का नाम नहीं, बल्कि अपनी सोच और आदतों में बदलाव लाकर कचरे को उपयोगी संसाधन में बदलने का संकल्प भी है।

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