*स्थानांतरण नीति में प्रस्तर 12 को स्पष्ट करने के लिए मुख्य सचिव को भेजा पत्र


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👉*स्थानांतरण नीति का प्रस्तर 12 मान्यता प्राप्त सेवा संघों के अध्यक्ष महामंत्री / सचिव के स्थानांतरण के छूट से संबंधित*

*लखनऊ।* राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने आज प्रदेश के मुख्य सचिव के आधिकारिक ईमेल पोर्टल पर एक पत्र भेजकर स्थानांतरण नीति विषयक शासनादेश 2026 के प्रस्तर 12 को कार्मिक विभाग द्वारा स्पष्ट किए जाने तथा विभागीय अधिकारियों को प्रस्तर 12 का वास्तविक उद्देश्य स्पष्ट करने के लिए पत्र भेजा है।

संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने अवगत कराया है कि स्थानांतरण नीति विषयक शासनादेश के प्रस्तर 12 में मान्यता प्राप्त संगठनों के अध्यक्ष/ सचिव जिसमें जनपद शाखा के अध्यक्ष एवं सचिव भी सम्मिलित हैं ,को उनके पद पर निर्वाचन की तिथि से 2 वर्ष तक स्थानांतरण से मुक्त रखने के निर्देश निर्गत किए गए हैं। संगठनों के संविधान के अनुसार जनपद शाखाओं में सचिव के स्थान पर मंत्री एवं प्रदेश स्तर पर सचिव के स्थान पर महामंत्री के पद पर निर्वाचन होता है।

प्रदेश स्तर पर महामंत्री एवं जनपद स्तर पर मंत्री पद नाम से संगठनों के लेटर हेड प्रयोग में लाए जाते हैं जो शासन/ प्रशासन स्तर पर लगातार प्रचलन में है तथा संगठनों के लेटर हेड पर अंकित महामंत्री एवं मंत्री पद पर कार्मिक अथवा किसी विभाग ने कोई आपत्ति नहीं किया है।ऐसी स्थिति में जनपद स्तर पर मंत्री अथवा सचिव एवं प्रदेश स्तर पर महामंत्री अथवा सचिव ही संगठन का संचालन करते हैं ।

खाद्य रसद विभाग में मंत्री एवं सदस्यों को दो अलग-अलग पद मानते हुए स्थानांतरण आदेश का गलत इंटरप्रिटेशन किया जा रहा है। पिछले सत्र में खाद्य आयुक्त द्वारा जनपद शाखा गाजीपुर के मंत्री का स्थानांतरण कर दिया गया। संगठन द्वारा प्रत्यावेदन देने के बाद भी कार्मिक विभाग के शासनादेश के प्रस्तर 12 का हवाला देकर, जिसमें मंत्री के स्थान पर सचिव शब्द अंकित है, स्थानांतरण निरस्त नहीं किया गया, जिसके कारण उच्च न्यायालय की स्थिति बनी।

उच्च न्यायालय ने भी मंत्री एवं सचिव को एक ही पद मानते हुए स्थानांतरण निरस्त करने के आदेश निर्गत किए परंतु प्रमुख सचिव खाद्य एवं रसद ने न्यायालय के आदेशों को भी दरकिनार कर दिया अभी भी प्रकरण अवमानना की स्थिति में उच्च न्यायालय में विचाराधीन है।

राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के अध्यक्ष जे एन तिवारी ने पत्र के माध्यम से मुख्य सचिव से अनुरोध किया है कि स्थानांतरण नीति विषय शासनादेश 2026 के प्रस्तर 12 को इस सीमा तक स्पष्ट कर दिया जाए कि सचिव अथवा मंत्री, महामंत्री अथवा सचिव, जिस भी पदनाम से चुनाव हुआ हो, उस पदधारक को स्थानांतरण से मुक्त रखा जाए साथ ही विभागों को भी या निर्देश जारी करने का अनुरोध किया गया है कि जनपद स्तर पर सचिव अथवा मंत्री तथा प्रदेश स्तर पर सचिव अथवा महामंत्री, केवल एक ही पद का निर्वाचन होता है। ऐसी स्थिति में संगठन में मंत्री अथवा महामंत्री के पद पर जो भी कर्मचारी कार्यरत है,उनको कार्मिक विभाग के शासनादेश के अनुरूप स्थानांतरण से विभागीय अधिकारी मुक्त रखें।

संयुक्त परिषद की महामंत्री अरुणा शुक्ला ने अवगत कराया है कि स्थानांतरण में यह बहुत बड़ी विसंगति है। इसके चलते खाद्य रसद ,समाज कल्याण, व्यवसायिक शिक्षा एवं कई अन्य विभागों में स्थानांतरण संबंधी विसंगतियां उत्पन्न हो चुकी हैं।

इनका निराकरण किए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने आशा व्यक्त किया है कि कार्मिक विभाग द्वारा निर्गत स्थानांतरण नीति विषयक शासनादेश दिनांक 2026 के प्रस्तर 12 को स्पष्ट करने पर विचार अवश्य किया जाएगा ताकि शासनादेश की मंशा के अनुरूप कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों को लाभ मिल सके।

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