विदेश जाने वाले 52 लाख कामगारों को मिला क्लीयरेंस

नई दिल्ली। विदेश मंत्रालय द्वारा विकसित ई-माइग्रेट पोर्टल विदेशी रोजगार की प्रक्रिया को पारदर्शी और सुगम बनाने में एक महत्वपूर्ण स्तंभ साबित हुआ है। इसके माध्यम से विशेष रूप से इमिग्रेशन चेक रिक्वायर्ड (ईसीआर) पासपोर्ट धारक भारतीय श्रमिकों के इमिग्रेशन को बेहद आसान बनाया गया है। वर्ष 2014 में पोर्टल के लॉन्च होने के बाद से अब तक 52 लाख से अधिक भारतीय वर्कर्स को सुरक्षित तरीके से ईसीआर देशों में नौकरी करने के लिए आधिकारिक तौर पर इमिग्रेशन क्लियरेंस प्रदान की जा चुकी है।
यह जानकारी विदेश राज्य मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह ने राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए दी। कांग्रेस सांसद रणदीप सिंह सुरजेवाला द्वारा पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए सिंह ने बताया कि केंद्र और राज्य सरकारों ने वर्ष 2021 से अब तक विदेशी कंपनियों और सरकारों के साथ कई द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं, जिनका सीधा उद्देश्य भारतीय कार्यबल को सुरक्षित और कानूनी रूप से विदेशी बाजार उपलब्ध कराना है।
जिन देशों में नौकरी के लिए सबसे अधिक भारतीयों को शीघ्र इमिग्रेशन क्लियरेंस प्राप्त हुआ, उनमें सऊदी अरब, यूएई और कुवैत का नाम सबसे ऊपर है, जिसकी संख्या क्रमशः 7,59,578, 5,08,995 और 2,28,206 है। इसके बाद कतर के लिए 1,65,089, ओमान के लिए 1,40,061 और बहरीन के लिए 41,327 इमिग्रेशन क्लियरेंस सफलतापूर्वक हुए हैं।
इसके अलावा विदेशों में भारतीय कामगारों के समक्ष आने वाली चुनौतियों के संबंध में सुरजेवाला द्वारा सदन में पूछे गए एक अन्य सवाल के जवाब में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार भारतीय नागरिकों के हितों की रक्षा करने, उनके अधिकारों को सुरक्षित रखने और उन्हें धोखाधड़ी करने वाले एजेंटों से बचाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। विदेश मंत्री ने काम के लिए विदेशों में गए ऐसे भारतीयों के बारे में भी बताया, जो कानूनी पेंच में फंसने और अन्य कई कारणों से अपने घऱ लौटने में असमर्थ थे और जिनकी भारत सरकार और भारतीय दूतावासों के सहयोग से वतन वापसी कराई गई।
डॉ. जयशंकर ने सदन के समक्ष एक सूची साझा की, जिसके अनुसार, इस वर्ष (मार्च महीने तक) सबसे अधिक अमेरिका से 414, ब्रिटेन से 57 और साइप्रस से 53 भारतीय डिपोर्ट हुए। मंत्री ने यह भी बताया कि देश में कुल 3,505 बिना रजिस्ट्रेशन वाले एजेंटों की जानकारी ई-माइग्रेट पोर्टल पर दी गई है, ताकि लोग धोखाधड़ी करने वालों से अलर्ट रहें और किसे के झांसे में न आएं।
(रिपोर्ट. शाश्वत तिवारी)

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