बाघ जन्म से आदमखोर नहीं होता

राजा सिंह विशेष संवाददाता लखनऊ
बाघ का स्वभाव कैसा होता है “बाघ आदमखोर मजबूरी में बनता है, अपनी मर्जी से नहीं”।
बाघ कभी जन्म से आदमखोर नहीं होता,कोई भी बाघ इंसानों का शिकार करने के इरादे से पैदा नहीं होता। बाघ तभी आदमखोर बनता है जब:
वह बहुत बूढ़ा हो जाए।
उसके दांत या पंजे टूट जाएं।
साही (Porcupine) के कांटे चुभने से वह इतना घायल हो जाए कि अपने प्राकृतिक शिकार (जैसे हिरण या जंगली सूअर) को न पकड़ सके।
बाघ एक ‘जेंटलमैन’ (सज्जन जीव) है बाघ जंगल का एक बड़ा दिल वाला सज्जन जीव (Gentleman) है।” अगर इंसान उसे बिना वजह न छेड़े, तो बाघ कभी बेवजह हमला नहीं करता।
इंसानों से डर और दूरी: आम खबरों में बाघ को खूंखार दिखाया जाता है, सामान्यतः बाघ इंसानों से बहुत डरता है और जब भी किसी इंसान की गंध या आहट पाता है, तो वह चुपचाप रास्ता बदल लेता है।
इंसानी गंध की पहचान: आदमखोर बाघ इंसानों को देखकर नहीं, बल्कि हवा में तैरती इंसानी गंध से पहचानते हैं। कई बार जब इंसान शांत बैठा रहता है, तो बाघ पास से गुजर जाता है और उसे पता भी नहीं चलता।
बाघों का अपना ‘जंगल कोड’: बाघ आपस में इलाका बांटकर रहते हैं। वे पेड़ की छाल पर नाखून मारकर और मूत्र की गंध छोड़कर अपना दायरा तय करते हैं, जिसे दूसरा बाघ आमतौर पर बिना चुनौती दिए पार नहीं करता।

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